हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला अनंत चतुर्दशी एक अत्यंत पवित्र और शुभ पर्व है। यह दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा के लिए समर्पित होता है और विशेष रूप से महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। anant chaturdashi wishes in hindi इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे Anant Chaturdashi 2025 in Hindi की तिथि, पूजा विधि, मंत्र, और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।
अगर आप इस पर्व को सही तरीके से मनाना चाहते हैं या इसके पीछे की आध्यात्मिक गहराई को समझना चाहते हैं, तो यह ब्लॉग आपके लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका है।
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अनंत चतुर्दशी का मुख्य उद्देश्य भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा करना है। यह दिन भक्तों को जीवन में सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त करने का अवसर देता है। अनंत का अर्थ है जिसका कोई अंत नहीं—और यही भगवान विष्णु का स्वरूप है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार कौंडिन्य ऋषि ने अनंत व्रत का अपमान किया, जिससे उनके जीवन में अनेक कठिनाइयाँ आईं। बाद में उन्होंने इस व्रत को विधिपूर्वक किया और उनके जीवन में सुख-शांति लौट आई। इस कथा से यह संदेश मिलता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
इस वर्ष अनंत चतुर्दशी 6 या 7 सितंबर को मनाई जाएगी, लेकिन पंचांग के अनुसार व्रत और पूजा का मुख्य दिन 6 सितंबर 2025 को रहेगा।
पूजा प्रारंभ: सुबह 6:02 बजे
पूजा समाप्ति: दोपहर 1:41 बजे
व्रत रखने का समय: सूर्योदय से सूर्यास्त तक
यह समय भगवान विष्णु की पूजा और अनंत सूत्र बांधने के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
अनंत सूत्र (14 गांठ वाला लाल रंग का धागा)
कलश
भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र
फूल, फल, पंचामृत
धूप, दीप, चंदन
प्रसाद (खीर, पूड़ी, चने)
घर को साफ करके पूजा स्थल तैयार करें।
कलश की स्थापना करें और उसमें जल भरें।
भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्थापित करें।
पंचामृत से स्नान कराएं और चंदन, फूल अर्पित करें।
अनंत सूत्र को भगवान के सामने रखें और मंत्रों के साथ पूजा करें।
पूजा के बाद अनंत सूत्र को पुरुष दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में बांधें।
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ॐ अनन्ताय नमः।
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जय विष्णु भगवान, जय विष्णु भगवान।
भक्त जनों के संकट हरते, जय विष्णु भगवान॥
इन मंत्रों और आरती से पूजा को पूर्णता मिलती है और भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
अनंत चतुर्दशी का एक विशेष पहलू यह है कि इसी दिन गणेश चतुर्थी के दौरान स्थापित गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन भी होता है। महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में यह दिन गणेश विसर्जन के रूप में भी प्रसिद्ध है। भक्त गणपति बप्पा को विदाई देते हैं और अगले वर्ष पुनः आगमन की कामना करते हैं।
मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन
पारिवारिक सुख और समृद्धि
रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ
व्रत के दिन सात्विक भोजन करें।
अनंत सूत्र को श्रद्धा से बांधें, बिना अपमान के।
पूजा में किसी भी प्रकार की लापरवाही न करें।
आज के समय में जब जीवन भागदौड़ से भरा हुआ है, ऐसे पर्व हमें आत्मिक जुड़ाव और सांस्कृतिक पहचान की याद दिलाते हैं। अनंत चतुर्दशी न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह परिवार को एक साथ लाने और सामूहिक पूजा का अवसर भी प्रदान करता है।
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बच्चों को इस पर्व की कथा और महत्व बताएं।
अनंत चतुर्दशी 2025 में 6 सितंबर को मनाई जाएगी। यह दिन भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ता है।
अनंत सूत्र एक लाल रंग का धागा होता है जिसमें 14 गांठें होती हैं। इसे पूजा के बाद पुरुष दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में बांधती हैं।
व्रत रखना अनिवार्य नहीं है, लेकिन इसे रखने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।
हाँ, अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश चतुर्थी के दौरान स्थापित गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।
बिलकुल, पूजा घर पर की जा सकती है। बस आवश्यक सामग्री और विधि का पालन करें।
अनंत चतुर्दशी 2025 in Hindi एक ऐसा पर्व है जो धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना का प्रतीक है और जीवन में सुख-शांति लाने का माध्यम भी। इस लेख में हमने तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और इससे जुड़े सभी पहलुओं को विस्तार से समझाया।
इस वर्ष अनंत चतुर्दशी को श्रद्धा और विधिपूर्वक मनाएं, ताकि आपके जीवन में भी अनंत सुख और समृद्धि का आगमन हो।